faqeeraana sadaa KHaamosh kyuuñ hai | फ़क़ीराना सदा ख़ामोश क्यूँ है

  - G R Kanwal
फ़क़ीरानासदाख़ामोशक्यूँहै
क़लंदरकीनवाख़ामोशक्यूँहै
जिसेमक़्सूदथाबसगुनगुनाना
वहीबाद-ए-सबाख़ामोशक्यूँहै
सदाक़तकुछबताअबमहफ़िलोंमें
तिरानग़्मा-सराख़ामोशक्यूँहै
फ़नाजबहरतरफ़मंडलारहीहै
तोऐसेमेंबक़ाख़ामोशक्यूँहै
हैमौसमलब-कुशाईकाचमनमें
शजरगुम-सुमहवाख़ामोशक्यूँहै
दिएजबऔरसारेजलरहेहैं
मोहब्बतकादियाख़ामोशक्यूँहै
'कँवल'जिसशहरमेंसबबोलतेहैं
वहाँइब्न-ए-ख़ुदाख़ामोशक्यूँहै
  - G R Kanwal
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