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Meenakshi Kumawat Meera
yahaañ apna makaan koi nahin hai
yahaañ apna makaan koi nahin hai | यहाँ अपना मकाँ कोई नहीं है
- Meenakshi Kumawat Meera
यहाँ
अपना
मकाँ
कोई
नहीं
है
ज़मीं
ओ
आसमाँ
कोई
नहीं
है
बहुत
हैं
हम-
सफ़र
सारे
जहाँ
में
जहाँ
तू
है
वहाँ
कोई
नहीं
है
- Meenakshi Kumawat Meera
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जो
भी
होना
था
हो
गया
छोड़ो
अब
मैं
चलता
हूँ
रास्ता
छोड़ो
अब
तो
दुनिया
भी
देख
ली
तुमने
अब
तो
ख़्वाबों
को
देखना
छोड़ो
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Vikram Sharma
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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मुसाफ़िरों
से
कहो
अपनी
प्यास
बाँध
रखें
सफ़र
की
रूह
में
सहरा
कोई
उतर
चुका
है
Aziz Nabeel
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मैं
अपने
आप
में
गहरा
उतर
गया
शायद
मिरे
सफ़र
से
अलग
हो
गई
रवानी
मिरी
Abbas Tabish
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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यहाँ
किसी
को
कोई
रास्ता
नहीं
देता
मुझे
गिरा
के
अगर
तुम
सँभल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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किताब
फ़िल्म
सफ़र
इश्क़
शा'इरी
औरत
कहाँ
कहाँ
न
गया
ख़ुद
को
ढूँढता
हुआ
मैं
Jawwad Sheikh
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रास्ता
भूल
के
आ
निकले
हैं
हम
तेरे
लोग
नहीं
थे
दुनिया
Ashraf Yousafi
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अपनी
मर्ज़ी
से
कहाँ
अपने
सफ़र
के
हम
हैं
रुख़
हवाओं
का
जिधर
का
है
उधर
के
हम
हैं
Nida Fazli
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ज़िंदगी
अपना
सफ़र
तय
तो
करेगी
लेकिन
हम-सफ़र
आप
जो
होते
तो
मज़ा
और
ही
था
Ameeta Parsuram Meeta
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ये
नवाज़ी
थी
मोहब्बत
तुझे
डरते
डरते
जान
तुझपे
ही
लुटानी
मुझे
मरते
मरते
Meenakshi Kumawat Meera
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मरज़
कौन
से
पाल
कर
के
रखे
नज़र
ही
नज़र
की
दवा
तो
नहीं
Meenakshi Kumawat Meera
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वफ़ा-ओ-जफ़ा
हैं
अलग
तो
अलग
रख
मिला
दोस्ती
में
न
इनको
अलग
रख
Meenakshi Kumawat Meera
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नज़र
तो
दाग़
आया
चाँद
में
भी
यहाँ
बे-दाग़
तो
कोई
नहीं
है
Meenakshi Kumawat Meera
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रात
की
आग़ोश
में
क्यूँ
ख़्वाब
खोने
जा
रहे
आज
फिर
बहला
मुझे
महताब
सोने
जा
रहे
Meenakshi Kumawat Meera
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