sitaaron se uljhta ja raha hooñ | सितारों से उलझता जा रहा हूँ

  - Firaq Gorakhpuri
सितारोंसेउलझताजारहाहूँ
शब-ए-फ़ुर्क़तबहुतघबरारहाहूँ
तिरेग़मकोभीकुछबहलारहाहूँ
जहाँकोभीसमझताजारहाहूँ
यक़ींयेहैहक़ीक़तखुलरहीहै
गुमाँयेहैकिधोकेखारहाहूँ
अगरमुमकिनहोलेलेअपनीआहट
ख़बरदोहुस्नकोमैंरहाहूँ
हदेंहुस्न-ओ-मोहब्बतकीमिलाकर
क़यामतपरक़यामतढारहाहूँ
ख़बरहैतुझकोज़ब्त-ए-मोहब्बत
तिरेहाथोंमेंलुटताजारहाहूँ
असरभीलेरहाहूँतेरीचुपका
तुझेक़ाइलभीकरताजारहाहूँ
भरमतेरेसितमकाखुलचुकाहै
मैंतुझसेआजक्यूँँशरमारहाहूँ
उन्हींमेंराज़हैंगुल-बारियोंके
मैंजोचिंगारियाँबरसारहाहूँ
जोउनमासूमआँखोंनेदिएथे
वोधोकेआजतकमैंखारहाहूँ
तिरेपहलूमेंक्यूँँहोताहैमहसूस
कितुझसेदूरहोताजारहाहूँ
हद-ए-जोर-ओ-करमसेबढ़चलाहुस्न
निगाह-ए-यारकोयादरहाहूँ
जोउलझीथीकभीआदमकेहाथों
वोगुत्थीआजतकसुलझारहाहूँ
मोहब्बतअबमोहब्बतहोचलीहै
तुझेकुछभूलतासाजारहाहूँ
अजलभीजिनकोसुनकरझूमतीहै
वोनग़्मेंज़िंदगीकेगारहाहूँ
येसन्नाटाहैमेरेपाँवकीचाप
'फ़िराक़'अपनीकुछआहटपारहाहूँ
  - Firaq Gorakhpuri
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