gham ka maara kabhi na ho koi | ग़म का मारा कभी न हो कोई

  - Farhat Abbas Shah
ग़मकामाराकभीहोकोई
बे-सहाराकभीहोकोई
जबहरइकशख़्सहोफ़क़तदरिया
जबकिनाराकभीहोकोई
गरकभीहोतोहोफ़क़ततश्बीह
इस्तिआ'राकभीहोकोई
क्यूँँभलाइसतरहतबीअ'तहो
क्यूँँगवाराकभीहोकोई
तूकिइकउम्रइंतिज़ारकरे
औरइशाराकभीहोकोई
इसक़दरहूँतहीख़ुदाकरे
जबख़साराकभीहोकोई
  - Farhat Abbas Shah
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