roti hui aankhoñ ka vo manzar nahin dekha | रोती हुई आँखों का वो मंज़र नहीं देखा

  - Fakhr Abbas
रोतीहुईआँखोंकावोमंज़रनहींदेखा
छोड़आएतोफिरहमनेपलटकरनहींदेखा
कुछवोभीसमझनेकातकल्लुफ़नहींकरते
कुछहमनेज़बाँसेकभीकहकरनहींदेखा
शायदउसीकमयाबकोकहतेहैंतबस्सुम
हमनेतिरेचेहरेपेजोअक्सरनहींदेखा
हमहुस्नब-अंदाज़-ए-हसींदेखनेवाले
सचबातहैतुझसाकोईपैकरनहींदेखा
इसज़ख़्मकाज़ालिमकोतोएहसासबहुतहै
जिसज़ख़्मकोहमनेकभीगिनकरनहींदेखा
हमकोतोसर-ए-हश्रथीइकऔरकसकभी
जातेहुएहमनेरुख़-ए-दिलबरनहींदेखा
  - Fakhr Abbas
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