kaddi thii dhoop sar chakra raha tha | कड़ी थी धूप सर चकरा रहा था

  - Faizul Amin Faiz
कड़ीथीधूपसरचकरारहाथा
मैंभूकाथाबहुतघबरारहाथा
तुम्हाराशहरक्याथाक्याबताऊँ
तमाशाहरकोईदिखलारहाथा
थेउसकेहाथमेंकश्कोललेकिन
वोमेहर-ओ-माहकोशरमारहाथा
अनाकासाँपमैंनेमारडाला
बहुतनुक़सानयेपहुँचारहाथा
अमीर-ए-शहरसयेकौनपूछे
सितमक्यूँमुफ़लिसोंपरढारहाथा
लगेठोकरतोख़ुदहीतुमसँभलजाओ
सफ़रकातजरबाबतलारहाथा
अकेलीथीकोईलड़कीसड़कपर
बदनजिसकामुझेललचारहाथा
येकैसाख़्वाबमैंने'फ़ैज़'देखा
समुंदरमेरीजानिबरहाथा
  - Faizul Amin Faiz
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