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Faizan Faizi
milnaa bichadna kaam to hota rahega dost ab
milnaa bichadna kaam to hota rahega dost ab | मिलना बिछड़ना काम तो होता रहेगा दोस्त अब
- Faizan Faizi
मिलना
बिछड़ना
काम
तो
होता
रहेगा
दोस्त
अब
जब
साथ
हैं
सब,
कुछ
नई
तस्वीर
तो
यूँंँ
ही
बना
- Faizan Faizi
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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अच्छा
है
दिल
के
साथ
रहे
पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन
कभी
कभी
इसे
तन्हा
भी
छोड़
दे
Allama Iqbal
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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वा'दा
करो
कि
हाथ
छुड़ाकर
न
जाओगे
वा'दा
करो
कि
सात
जनम
तक
रहेगा
इश्क़
Mukesh Jha
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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जाने
अब
वो
किसके
साथ
निकलता
होगा
रातों
को
जाने
कौन
लगाता
होगा
दो
घंटे
तैयारी
में
Danish Naqvi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ
नहीं
पास
अब
मिरे
खोने
को
फरवरी
माह
है
फ़क़त
रोने
को
Faizan Faizi
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फ़रिश्ते
कान
में
बोलेंगे
इक
दिन
चलो
सरकार
से
मिलना
नहीं
है
Faizan Faizi
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हम
तुम्हारे
इश्क़
के
इमकान
में
फूल
लेकर
हैं
खड़े
मैदान
में
बात
को
समझो
अनाएँ
छोड़
दो
रूठ
के
बैठो
न
यूँँ
मुल्तान
में
फूल
से
ख़ुश्बू
जुदा
होने
लगी
रख
दिए
थे
आप
जब
गुलदान
में
एक
दिन
देखा
किसी
के
साथ
में
हँस
रही
थी
बैठ
कर
दालान
में
जा
चुके
जो
लोग
फिर
आते
नहीं
है
यही
फ़ितरत
यहाँ
इंसान
में
पूछना
था
क्या
हुआ
था
उस
घड़ी
रो
रहे
थे
लोग
जब
ज़िंदान
में
इक
तरफ़
रख
दो
सभी
रंगीनियांँ
इक
तरफ़
ग़म
को
रखो
मीजा़न
में
दोस्त
मेरे
हैं
सभी
अच्छे
मगर
नाम
उनका
दर्ज
है
शैतान
में
जब
ग़रीबों
की
मदद
करना
कभी
याद
मत
रखना
उसे
एहसान
में
कुछ
नहीं
हासिल
हुआ
मुझ
को
यहाँ
कट
रही
है
उम्र
बस
नुक़सान
में
आसमाँ
पे
जब
बुलाना
हो
ख़ुदा
मौत
से
कहना
मिले
रमज़ान
में
देख
लो
बेहतर
किसी
भी
जान
में
कुछ
नहीं
है
ख़ूबियाँ
फैजा़न
में
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Faizan Faizi
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अली
के
चाहने
वालों
को
देखो
लगाए
भीड़
हैं
करबल
में
बैठे
Faizan Faizi
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ये
क्या
हर
बात
पे
लड़ना
झगड़ना
कभी
लग
कर
गले
समझाओ
मुझको
Faizan Faizi
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