har taraf jalwa-e-firozaan hai | हर तरफ़ जल्वा-ए-फ़रोज़ाँ है

  - Faiz Tabassum Tonsvi
हरतरफ़जल्वा-ए-फ़रोज़ाँहै
सह्न-ए-हस्तीमेंइकचराग़ाँहै
हुस्नहीहुस्नहैनिगाहोंमें
ज़र्राज़र्रागुहर-बदामाँहै
फूलतोखिलरहेहैंगुलशनमें
अपनीक़िस्मतहैअपनादामाँहै
वफ़ा-ना-शनासवक़्तबता
आजफिरकिससेअहद-ओ-पैमाँहै
ज़िंदगीसेजनमकासाथमिरा
ज़िंदगीमुझसेक्यूँगुरेज़ाँहै
आजमौसमहसींहैजान-ए-बहार
आजचलिएकिबाद-ओ-बाराँहै
मौजज़नएकक़ुल्ज़ुम-ए-ख़ूँहै
डूबीडूबीसीनब्ज़-ए-दौराँहै
साँसलेनानसीबहैमुझको
ज़िंदगीपेभीतेराएहसाँहै
जिसकोइंसानियतसेनफ़रतहै
अहद-ए-हाज़िरयेतेराइंसाँहै
जिसकीतकमीलआजतकहुई
मैंहूँऔरमेरेदिलकाअरमाँहै
'फ़ैज़'कोपूछतेरहोयारो
सुनतेहैंइकअजीबइंसाँहै
  - Faiz Tabassum Tonsvi
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