tamaam husn-o-maani ka rang udne laga | तमाम हुस्न-ओ-मआ'नी का रंग उड़ने लगा

  - Faiz Khalilabadi
तमामहुस्न-ओ-मआ'नीकारंगउड़नेलगा
खिलीजोधूपतोपानीकारंगउड़नेलगा
इशाराकरतीहैंचेहरेकीझुर्रियाँचुप-चाप
तोक्याबदनसेजवानीकारंगउड़नेलगा
जदीदरंगमेंआयाजोमिस्रा-ए-ऊला
हसदसेमिस्रा-ए-सानीकारंगउड़नेलगा
किताब-ए-ज़ीस्तकेमफ़्हूमकोसमझतेही
यहाँबड़ेबड़ेज्ञानीकारंगउड़नेलगा
जोदाइमीथावहीरहगयाहैज़ेहनोंमें
जोआरज़ीथाकहानीकारंगउड़नेलगा
मिरीनज़रसेमिली'फ़ैज़'जबनज़रउसकी
तोमेरेदुश्मन-ए-जानीकारंगउड़नेलगा
  - Faiz Khalilabadi
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