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Faiz Ahmad Faiz
dil se to har moamala kar ke chale the saaf ham
dil se to har moamala kar ke chale the saaf ham | दिल से तो हर मोआ'मला कर के चले थे साफ़ हम
- Faiz Ahmad Faiz
दिल
से
तो
हर
मोआ'मला
कर
के
चले
थे
साफ़
हम
कहने
में
उन
के
सामने
बात
बदल
बदल
गई
- Faiz Ahmad Faiz
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तारीकियों
को
आग
लगे
और
दिया
जले
ये
रात
बैन
करती
रहे
और
दिया
जले
उस
की
ज़बाँ
में
इतना
असर
है
कि
निस्फ़
शब
वो
रौशनी
की
बात
करे
और
दिया
जले
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Tehzeeb Hafi
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इस
लिए
रौशनी
में
ठंडक
है
कुछ
चराग़ों
को
नम
किया
गया
है
Tehzeeb Hafi
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उसकी
जुल्फ़ें
उदास
हो
जाए
इस-क़दर
रोशनी
भी
ठीक
नहीं
तुमने
नाराज़
होना
छोड़
दिया
इतनी
नाराज़गी
भी
ठीक
नहीं
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Fahmi Badayuni
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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ज़ेहनियत
को
साफ़
रखना
सीखिए
लड़कियाँ
यूँँ
भी
तो
हँसती-बोलती
हैं
Pratap Somvanshi
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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वो
बात
सारे
फ़साने
में
जिस
का
ज़िक्र
न
था
वो
बात
उन
को
बहुत
ना-गवार
गुज़री
है
Faiz Ahmad Faiz
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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'आप
की
याद
आती
रही
रात
भर''
चाँदनी
दिल
दुखाती
रही
रात
भर
गाह
जलती
हुई
गाह
बुझती
हुई
शम-ए-ग़म
झिलमिलाती
रही
रात
भर
कोई
ख़ुशबू
बदलती
रही
पैरहन
कोई
तस्वीर
गाती
रही
रात
भर
फिर
सबा
साया-ए-शाख़-ए-गुल
के
तले
कोई
क़िस्सा
सुनाती
रही
रात
भर
जो
न
आया
उसे
कोई
ज़ंजीर-ए-दर
हर
सदा
पर
बुलाती
रही
रात
भर
एक
उम्मीद
से
दिल
बहलता
रहा
इक
तमन्ना
सताती
रही
रात
भर
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Faiz Ahmad Faiz
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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