roz is aas pe darwaaza khula rakhta hooñ | रोज़ इस आस पे दरवाज़ा खुला रखता हूँ

  - Faisal Hashmi
रोज़इसआसपेदरवाज़ाखुलारखताहूँ
शायदजाएवोचुपकेसेकभीउसजानिब
वोजोदुनियासेबहुतदूरीपर
आगकेख़ौफ़से
सह
मेंहुएइकलम्हेमें
छुपकेबच्चेकीतरहबैठाहै
मुंतज़िरहूँकिकोईउसकोसहारादेदे
जिसेवोथामके
ज़ुल्मतकासफ़रतयकरले
औरमिलजाएवोमुझसेकिमिरेचेहरेपर
मेरीआँखोंनेसजारक्खाहैउम्मीदकाबाब
  - Faisal Hashmi
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