us ko mire KHvaabon ka rastaa | उस को मिरे ख़्वाबों का रस्ता

  - Faheem Shanas Kazmi
उसकोमिरेख़्वाबोंकारस्ता
जानेकिसनेदिखायाहै
मैंजबआधीरातकोथककर
अपने-आपपेगिरताहूँ
वोचुपकेसेजातीहै
सब्ज़सुनहरेख़्वाबलिए
नर्मगुलाबीहाथोंसेमिरेबालोंकोसुलझातीहै
धी
मेंसुरोंमें
'फ़ैज़'कीनज़्मसुनातीहै
मैंउसकोदेखतारहताहूँ
नींदमेंजागतारहताहूँ
औरवोमेरेबाज़ूपर
सररखकरसोजातीहै
सपनोंमेंखोजातीहै
वोख़्वाबमेंहँसतीरहतीहै
मैंजागकेरोतारहताहूँ
  - Faheem Shanas Kazmi
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