jin galiyon ka suraj | जिन गलियों का सूरज

  - Faheem Shanas Kazmi
जिनगलियोंकासूरज
रस्ताभूलगयाहो
उनमेंकिसीभीआहटका
कोईगीतनहींगूँजाकरता
बोसीदादरवाज़े
खिड़कियाँ
बलखातेचोबीज़ीनोंपर
नाचतीरहतीहैवीरानी
गर्द-ओ-ग़ुबारमेंडूबेकमरे
आपसमेंबातेंकरतेहैं
बंददरीचे
साँपोंजैसीआँखोंसे
दूर-दराज़कोजानेवाली
सब्ज़रुतोंकीयादोंमें
रोतेरोतेसोजातेहैं
उनसबलोगोंकीयादोंमें
जिनकीजिस्मोंकीख़ुशबूको
सैंतकेरखनेवालेलम्हे
माह-ओ-सालकीगर्दमेंदबतेजातेहैं
बंदघरोंकीख़ुशबूसे
ख़ामोशीऔरतंहाईमौतकीबातेंकरतेहैं
  - Faheem Shanas Kazmi
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