ishq ki tund-khezi ke auqaat aaKHir hue | इश्क़ की तुंद-ख़ेज़ी के औक़ात आख़िर हुए

  - Faheem Shanas Kazmi
इश्क़कीतुंद-ख़ेज़ीकेऔक़ातआख़िरहुए
मुबारज़-तलबज़िंदगी
अलविदा
अलविदा.....अपनेऔक़ातआख़िरहुए
ख़्वाबकीलहरमें
दर्दकेशहरमें
गर्द.....रख़्त-ए-सफ़र
दिललहूमेंहैतर
ज़िंदगीकटगईतेग़कीधारपर
सज्दाकरतेजबींकितनीज़ख़्मीहुई
औरख़ुदाआजतकहमसेराज़ीनहीं
औरज़मींसख़्तहै
मंज़िलेंगर्दहैं
बादलोंकीतरहग़मबरसतारहा
चारजानिबयहाँआगहीआगहै
मुबारज़-तलबज़िंदगी
प्यारकेफूलले
दर्दकीधूलले
मेरेहोनेकेसबख़्वाबलौटामुझे
आख़िरीशामहै
आख़िरीम'अरकाहै
किफिरइसकेब'अद
हमकहाँतुमकहाँ
औरहुएभीअगरतोफिरऐसेकहाँ
आख़िरीवारतेराहैकारीबहुत
ग़मकीशिद्दतसेदिलमेराभारीबहुत
वार
इकऔरवार
मौतकेसर्दबोसेसेसरशारदिल
तेरीक़ुर्बतकीचाहतमेंमरतारहा
उम्रभरतुझसेजारीरहाम'अरका
मुबारज़-तलबज़िंदगी
दिनभीढलहीगया
शामभीथकगई
रूह-ए-उम्र-ए-रवाँ
होरहीहैअज़ाँ
शामढलनेसेपहलेहमेंअज्रदे
यूँँहमेंअज्रदे
जाँरहेहीनहीं
ख़स्तातनमेंकहीं
हमकहेंअलविदा
अलविदा
मुबारज़-तलबज़िंदगीइश्क़कीतुंद-ख़ेज़ीकेऔक़ातआख़िरहुए
ज़िंदगीतेरेलम्हातआख़िरहुए
  - Faheem Shanas Kazmi
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