ai shaikh mujh ko khwaahish-e-baag-e-irm nahin | ऐ शैख़ मुझ को ख़्वाहिश-ए-बाग़-ए-इरम नहीं

  - Faheem Gorakhpuri
शैख़मुझकोख़्वाहिश-ए-बाग़-ए-इरमनहीं
कूचाबुतोंकामेरेलिएउससेकमनहीं
पहलीसीउसमेंआदत-ए-जौर-ओ-सितमनहीं
अफ़्सोसअबयहीहैकिइसवक़्तहमनहीं
हाँकू-ए-ग़ैरमेंतिरेनक़्श-ए-क़दमनहीं
तुझपरमिरागुमानख़ुदाकीक़समनहीं
मुझनीम-जाँकेक़त्लमेंताख़ीरइसक़दर
मा'लूमहोगयातिरेख़ंजरमेंदमनहीं
नालोतुम्हारेहाथहैफ़ुर्क़तमेंअपनीशर्म
देखेंतोआजचर्ख़नहींहैकिहमनहीं
आब-ए-बक़ाहोमुझकोपिलाओजोआब-ए-तेग़
तुमज़हरभीजोदोतोवोअमृतसेकमनहीं
करताहैमुझसेअहद-ए-वफ़ातोवोबुतमगर
मुझकोकुछए'तिबारख़ुदाकीक़समनहीं
मुमकिननहींकहींहोठिकाना'फहीम'का
तेरीनिगाह-ए-लुत्फ़अगरसनमनहीं
  - Faheem Gorakhpuri
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