ai jaan shab-e-hijraan tiri sakht badi hai | ऐ जान शब-ए-हिज्राँ तिरी सख़्त बड़ी है

  - Faez Dehlvi
जानशब-ए-हिज्राँतिरीसख़्तबड़ीहै
हरपलमगरइसनिसकीब्रम्हाकीघड़ीहै
हरबालमेंहैमेरादिल-ए-साफ़गिरफ़्तार
क्याख़ूबतिरीज़ुल्फ़मेंमोतियाँकीलड़ीहै
नीलमकीझलकदेतीहैयाक़ूतमेंगोया
सोतेरेलब-ए-लालपेमिस्सीकीधड़ीहै
थेज़िक्रदराज़ीकेतिरीहिज्रकीशबके
क्यापहुँचीशिताबकेतिरीउम्रबड़ीहै
सूरजकाजलानेकूँजिगरजि
यूँँदिल-ए-'फ़ाएज़'
नारतूक्यूँँधूपमेंसरखोलखड़ीहै
  - Faez Dehlvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy