dil bujh gaya to garmi-e-baazaar bhi nahin | दिल बुझ गया तो गर्मी-ए-बाज़ार भी नहीं

  - Ejaz Warsi
दिलबुझगयातोगर्मी-ए-बाज़ारभीनहीं
अबज़िक्र-ए-बादा-ओ-लब-ओ-रुख़सारभीनहीं
अपनाथाख़ल्वतोंमेंकभीपरतव-ए-जमाल
क़िस्मतमेंअबतोसाया-ए-दीवारभीनहीं
शिकवाज़बाँपेफूलसेअहबाबकाग़लत
दोस्तमुझकोतोगिला-ए-ख़ारभीनहीं
आयारासआपकोशैख़रोज़-ए-हश्र
औरलुत्फ़येहैआपगुनाहगारभीनहीं
क़ाएमहूँअपनीतौबापेमैंआजभीमगर
कोईहसींपिलाएतोइंकारभीनहीं
क्याकीजिएनुमाइश-ए-ग़मख़ून-ए-दिलकेबा'द
अबआरज़ू-ए-दीदा-ए-ख़ूँबारभीनहीं
ऐलान-ए-बे-ख़ुदीहैहरइकक़तरा-ए-लहू
मेरेजुनूँकीहदरसन-ओ-दारभीनहीं
नूर-ए-सहरकेनामपेभटकेंक़ाफ़िले
दर-अस्लअभीतोसुब्हकेआसारभीनहीं
वाइज़ख़याल-ए-तौबाबजाहैमगरअभी
मैंतोब-क़द्र-ए-ज़र्फ़गुनाहगारभीनहीं
  - Ejaz Warsi
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