guzarte vaqt ke veeraan jazeeron ki saza peshaaniyon par sabt hai | गुज़रते वक़्त के वीराँ जज़ीरों की सज़ा पेशानियों पर सब्त है

  - Ejaz Gul
गुज़रतेवक़्तकेवीराँजज़ीरोंकीसज़ापेशानियोंपरसब्तहै
आज़ुर्दगीकेकीलजिस्मोंमेंगड़ेहैं
बद-नसीबीगर्दनोंकातौक़है
औरमेहनतोंकेहातख़ालीहैं
हवाकेसाथगंदुमकीमहकशहरोंमेंउड़तीहै
ज़ख़ीराघरमुक़फ़्फ़लहैं
मशक़्क़तकाबदलकड़वेकसीलेमौसमोंकाज़ाइक़ाहै
हमपुरानीझोलियाँफैलाएख़्वाहिशकेअँधेरेरास्तोंपर
उल्टेलटकेचीख़तेहैं
औरख़ुश-फ़हमीकीमिट्टीपरलकीरेंखींचतेहैं
आसमाँकीसम्ततकतेहैं
किशायदरात-दिनकेदरमियानीफ़ासलोंकेख़त्महोनेकीबशारतहो
दुखोंकेकाग़ज़ोंपेसुखइबारतहो
  - Ejaz Gul
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