kyuuñ mire KHvaab ko dhundlaate ho | क्यूँ मिरे ख़्वाब को धुँदलाते हो

  - Ejaz Farooqi
क्यूँमिरेख़्वाबकोधुँदलातेहो
ख़्वाब
अंगड़ाईहै
थरथरातेहुएपाँव
बीतीआवाज़ोंकीलहरें
औरबलखाताहुआसीमींबदन
जिसकेइकइकअंगमेंमेरेलहूकीधड़कन
आसमानोंकीतरफ़उठतेहुएवोमरमरींबाज़ू
किसीशाहीनकीपरवाज़
औरहाथोंकीपोरोंसेशुआ'ओंकीफुवार
ख़्वाबकोअंगड़ाइयोंकीएकबलखातीहुईपरवाज़बननेदो
जोमेरेख़्वाबकोधुँदलाओगे
तोटुकड़ेटुकड़ेहोकेतुमख़ुदमुंजमिदहोजाओगे
याबीतीआवाज़ोंमेंडूबोगे
याअपनेख़ूनकेइसतेज़धारेहीमेंबहजाओगे
याजलतीशुआ'ओंकीतमाज़तमेंभस्महोजाओगे
  - Ejaz Farooqi
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