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Ejaz Azmi
do taraf tha hujoom sadiyon ka
do taraf tha hujoom sadiyon ka | दो तरफ़ था हुजूम सदियों का
- Ejaz Azmi
दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
- Ejaz Azmi
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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सदियों
से
किनारे
पे
खड़ा
सूख
रहा
है
इस
शहर
को
दरिया
में
गिरा
देना
चाहिए
Mohammad Alvi
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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मैं
था
सदियों
के
सफ़र
में
'अहमद'
और
सदियों
का
सफ़र
था
मुझ
में
Ahmad Khayal
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ये
जब्र
भी
देखा
है
तारीख़
की
नज़रों
ने
लम्हों
ने
ख़ता
की
थी
सदियों
ने
सज़ा
पाई
Muzaffar Razmi
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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तिरी
सदा
का
है
सदियों
से
इंतिज़ार
मुझे
मिरे
लहू
के
समुंदर
ज़रा
पुकार
मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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जिस
भी
फ़नकार
का
शहकार
हो
तुम
उस
ने
सदियों
तुम्हें
सोचा
होगा
Ahmad Nadeem Qasmi
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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तूने
सोचा
भी
है
जानाँ
कि
तेरे
वादे
ने
कितनी
सदियों
से
नहीं
पहना
अमल
का
पैकर
Subhan Asad
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मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
Ejaz Azmi
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ख़्वाब
ओ
ताबीर-ए-बे-निशाँ
मैं
था
एक
रूदाद-ए-राएगाँ
मैं
था
दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
बहते
पानी
पे
जिस
की
थी
बुनियाद
ख़ाम
मिट्टी
का
वो
मकाँ
मैं
था
मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
सूरत-ए-नुक़्ता-ए-हुबाब
'एजाज़'
महरम-ए-बहर-ए-बेकराँ
मैं
था
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Ejaz Azmi
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ख़्वाब
ओ
ताबीर-ए-बे-निशाँ
मैं
था
एक
रूदाद-ए-राएगाँ
मैं
था
दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
बहते
पानी
पे
जिस
की
थी
बुनियाद
ख़ाम
मिट्टी
का
वो
मकाँ
मैं
था
मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
सूरत-ए-नुक़्ता-ए-हुबाब
'एजाज़'
महरम-ए-बहर-ए-बेकराँ
मैं
था
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Ejaz Azmi
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