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Ejaz Azmi
KHvaab o tabeer-e-be-nishaan main tha
KHvaab o tabeer-e-be-nishaan main tha | ख़्वाब ओ ताबीर-ए-बे-निशाँ मैं था
- Ejaz Azmi
ख़्वाब
ओ
ताबीर-ए-बे-निशाँ
मैं
था
एक
रूदाद-ए-राएगाँ
मैं
था
दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
बहते
पानी
पे
जिस
की
थी
बुनियाद
ख़ाम
मिट्टी
का
वो
मकाँ
मैं
था
मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
सूरत-ए-नुक़्ता-ए-हुबाब
'एजाज़'
महरम-ए-बहर-ए-बेकराँ
मैं
था
- Ejaz Azmi
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
Ejaz Azmi
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ख़्वाब
ओ
ताबीर-ए-बे-निशाँ
मैं
था
एक
रूदाद-ए-राएगाँ
मैं
था
दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
बहते
पानी
पे
जिस
की
थी
बुनियाद
ख़ाम
मिट्टी
का
वो
मकाँ
मैं
था
मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
सूरत-ए-नुक़्ता-ए-हुबाब
'एजाज़'
महरम-ए-बहर-ए-बेकराँ
मैं
था
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Ejaz Azmi
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दो
तरफ़
था
हुजूम
सदियों
का
एक
लम्हा
सा
दरमियाँ
मैं
था
Ejaz Azmi
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