aankh hi dard pahchaanti hai | आँख ही दर्द पहचानती है

  - Ehsan Akbar
आँखहीदर्दपहचानतीहै
मैंइसरूटपर
पहेलीगाड़ीकामेहमाँथा
बे-तरहघूमतीगेंदपरअबनफ़सजितनेअन्फ़ासकाऔरमेहमानहै
उनकीगिनतीमिरीदास्ताँमेंनहीं
ख़ाककीनाफ़सेख़ाककेबत्नतक
चंदसाआ'तकीरौशनी
पोशिशेंबत्तियाँताज़ामोडलक्लब
ताज़ा-रुख़गाड़ीऔरबानऔरगुल-चेहराइंटरप्रेटर
यहीचार-आइनाचेहरा
किचेहरेमेंतस्वीर-ए-अय्यामसे
रौनक़ोंमेंबसेइसतिलिस्मातमें
दिनजोवीराँकटे
जोशीशेंघनीरातमेंखोगईं
सोगईं
आसमानोंपेख़ालीकाचाँद
नाक-नक़्शाबिखरनेपेक़ादिरहुआ
जिसकीतहवीलमेंदोमुँदेदाएरेआँखकेहैं
फ़क़तआँखकेहाथपरनक़्शहैंआँखख़ालीनहीं
  - Ehsan Akbar
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