mujh ko qadam qadam pe tira intizaar hai | मुझ को क़दम क़दम पे तिरा इंतिज़ार है

  - Dua Ali
मुझकोक़दमक़दमपेतिराइंतिज़ारहै
शायदकिमेरेवास्तेफ़स्ल-ए-बहारहै
आँखोंसेतूनेमुझकोपिलाईथीवोशराब
मेरेबदनमेंआजभीउसकाख़ुमारहै
बैठीहूँइंतिज़ारमेंतकतीहूँरहतिरी
राहतसुकून-ओ-चैनमुझकोक़रारहै
आयापलटकेतूख़बरतेरीसकी
यादोंकाआजभीतिरीक़ाएममज़ारहै
जोलोगसच्चेइश्क़मेंमक़्बूलहोगए
शाह-ए-दिलहमाराभीउनमेंशुमारहै
उड़उड़केरहीहैमहकतेरेजिस्मकी
महसूसहोरहाहैयेतेरादयारहै
कलरातमेरेख़्वाबमेंचू
मेंथेउसनेलब
शायदयेउसकेलम्सकामुझपरनिखारहै
  - Dua Ali
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