gham ki aaghosh men pali hai abhii | ग़म की आग़ोश में पली है अभी

  - Dr. Rahi
ग़मकीआग़ोशमेंपलीहैअभी
उलझीउलझीसीज़िंदगीहैअभी
जामपरजामपीरहाहूँमगर
मेरेहोंटोंकोतिश्नगीहैअभी
ज़िंदगीमेरेहक़मेंतेरेबग़ैर
लम्हालम्हासदीसदीहैअभी
रौशनीबनकेतुमचलेआओ
ख़ाना-ए-दिलमेंतीरगीहैअभी
कबसेहूँअपनीज़िंदगीकेसाथ
औरवोमुझसेअजनबीहैअभी
वक़्तहैमुझकोदेखतेजाओ
मेरीआँखोंमेंज़िंदगीहैअभी
  - Dr. Rahi
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