ulfat ke jab se aam kaii raaz ho ga.e | उल्फ़त के जब से आम कई राज़ हो गए

  - Dr. Anand Kishore
उल्फ़तकेजबसेआमकईराज़होगए
बदलेहुएजहानकेअंदाज़होगए
हालाँकिरोज़आतेथेमर्ज़ीसेअपनीवो
इकदिनबुलायाहमनेतोनाराज़होगए
पलपलबदलतेरंगहैंइंसानकिसकिसतरह
समझाथाजिनकोदोस्तदग़ाबाज़होगए
जिनकाकोईअतापताथाकिसीकोभी
चिड़ियाहुईजवाँतोकईबाज़होगए
वोरक़्सथाकिख़ूँसेज़मींलालहोगई
ख़ामोशजितनेभीथेवहाँसाज़होगए
आनंदकिसतरहसेबदलताहैवक़्तभी
बुज़दिलजोकलतलकथेवोजाँ-बाज़होगए
  - Dr. Anand Kishore
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