ehsaas pe chaaya hai ik ehsaas-e-garaan aur | एहसास पे छाया है इक एहसास-ए-गराँ और

  - Dr. Ahmar Rifai
एहसासपेछायाहैइकएहसास-ए-गराँऔर
अबदिलभीधड़कताहैतोहोताहैगुमाँऔर
अल्लाहरेआशुफ़्तगी-ए-शौक़काआलम
करतेहैंवोपुर्सिशतोगुज़रताहैगुमाँऔर
थमतीहीनहींजोशिश-ए-जज़्बात-ए-मोहब्बत
कहतेहैंकुछउनसेतोबहकतीहैज़बाँऔर
इकरब्तबहर-हालहैउसराहत-ए-जाँसे
बढ़ताहैतोबढ़नेदोअभीदर्द-ए-निहाँऔर
शायदकिअभीख़त्मनहींसिलसिला-ए-शौक़
नज़रोंमेंहैइकमंज़िल-ए-बेनाम-ओ-निशाँऔर
वाक़िफ़हैंवोख़ुदअपनेहरअंदाज़-ए-सितमसे
हमकैसेकहेंदिलमेंहैंज़ख़्मोंकेनिशाँऔर
क्याक़हरहैमजबूरी-ए-आदाब-ए-मोहब्बत
लेतेहैंतिरानामतोरुकतीहैज़बाँऔर
'अह्मर'तपिश-ए-शौक़सलामतहैकिपहरों
रहरहकेअभीदिलसेजोउठताहैधुआँऔर
  - Dr. Ahmar Rifai
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