zamaane ko rulaate phir rahe hain | ज़माने को रुलाते फिर रहे हैं

  - Divy Kamaldhwaj
ज़मानेकोरुलातेफिररहेहैं
सुख़न-वरग़मउठातेफिररहेहैं
येशाइरलेकेसबआसानबातें
उन्हेंमुश्क़िलबनातेफिररहेहैं
जोकहतेहैंख़ुदाहैआख़िरीसच
हमेंजन्नतदिखातेफिररहेहैं
नहींलगताकहींभीदिलहमारा
सभीकोआज़मातेफिररहेहैं
ग़मआयाशक़्ललेकरआजतेरी
सोग़ममेंमुस्कुरातेफिररहेहैं
जोऔरोंकोसहारादेरहेथे
वोअबख़ुदलड़खड़ातेफिररहेहैं
कोईतोबातसूरजमेंभीहोगी
जोग्रहचक्करलगातेफिररहेहैं
मुहब्बत'जौन'जैसीहोगईहै
यक़ींसबकोदिलातेफिररहेहैं
  - Divy Kamaldhwaj
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