शगूफ़े ख़ूब खिले अबकी बार यादों के

  - divya 'sabaa'
शगूफ़ेख़ूबखिलेअबकीबारयादोंके
हरेभरेहीरहेशाख़-सारयादोंके
ठहरठहरकेउतरतेहैंवादी-ए-दिलमें
परिंदेशामढलेबे-शुमारयादोंके
खिलीहुईहैजोतन्हाइयोंकीधूपतोक्या
हैंरहगुज़रमेंअभीशाख़-सारयादोंके
तमामउम्ररहीहूँअसीरमाज़ीकी
किमेरेचारोंतरफ़थेहिसारयादोंके
दयार-ए-शबकीगुज़रगाहमेंपड़ीहूँअभी
पड़ावडालेहुएसदहज़ारयादोंके
जलाकेराखकरेंगे'सबा'कभीमुझको
सुलगरहेहैंजोदिलमेंशरारयादोंके
  - divya 'sabaa'
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