ghar laut ke jaane ke khayaalaat li.e vo | घर लौट के जाने के ख़यालात लिए वो

  - divya 'sabaa'
घरलौटकेजानेकेख़यालातलिएवो
ख़्वाबोंमेंभीमिलतेहैंशिकायातलिएवो
ज़ख़्मोंकीहरइकटीसपेरुकजातेहुएहम
तारोंकीगुज़रतीहुईबारातलिएवो
इसशोर-शराबेमेंचलेआएँकभीतो
परियोंकीतरहनींदकेनग़्मातलिएवो
किससोचमेंउलझनमेंखड़ेहैंमेरेनज़दीक
होंठोंपेमुहब्बतकीदबीबातलिएवो
इनकारकीआँखोंसेझलकताहुआइक़रार
इकलुत्फ़मेंसौलुत्फ़-ए-इनायातलिएवो
माथेपेजलाएहुएइकसुब्हकीक़िंदील
घनघोरखुलीज़ुल्फ़ोंमेंइकरातलिएवो
सुधभूलेकँवलनैनोंमेंवोनींदकेझोंके
सोजातेसबाहाथोंमेंयूँँहाथलिएवो
  - divya 'sabaa'
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy