badan hai mom kii gathri pighalna hi nahin kaafi | बदन है मोम की गठरी पिघलना ही नहीं काफ़ी

  - Uday Divakar
बदनहैमोमकीगठरीपिघलनाहीनहींकाफ़ी
बिनातासीरसूरतकाबदलनाहीनहींकाफ़ी
हज़ारोंभीड़मेंभीवोदिखाईदेज़रूरीहै
चराग़ोंकोख़बरकरदोकिजलनाहीनहींकाफ़ी
ज़ुबाँकोखींचआँखेंनोचहरवहशीदरिंदेकी
सर-ए-बाज़ारइनकासरकुचलनाहीनहींकाफ़ी
हज़ारोंख़्वाहिशोंकोदफ़्नकरदुखबाँटनाहोगा
मिरेहमराहमेरेसाथचलनाहीनहींकाफ़ी
मोहब्बतदर्दहोयाहोदवाइकबारमेंइसको
उगलनाहीनहींकाफ़ीनिगलनाहीनहींकाफ़ी
उठाशमशीरलड़नाइसदफ़ाहस्तीबचानेको
'उदय'इसबारसिक्केकाउछलनाहीनहींकाफ़ी
  - Uday Divakar
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