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Dipendra Singh 'Raaz'
nazar to aayegi veeraan ab meri aañkhen
nazar to aayegi veeraan ab meri aañkhen | नज़र तो आएगी वीरान अब मेरी आँखें
- Dipendra Singh 'Raaz'
नज़र
तो
आएगी
वीरान
अब
मेरी
आँखें
तमाम
ख़्वाब
इन
आँखों
के
मर
गए
कल
शब
- Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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मैं
कहाँ
जाऊँ
करूँँ
किस
से
शिकायत
उस
की
हर
तरफ़
उस
के
तरफ़-दार
नज़र
आते
हैं।
Zubair Ali Tabish
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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दिल्ली
के
न
थे
कूचे
औराक़-ए-मुसव्वर
थे
जो
शक्ल
नज़र
आई
तस्वीर
नज़र
आई
Meer Taqi Meer
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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लौट
जाती
है
उधर
को
भी
नज़र
क्या
कीजे
अब
भी
दिलकश
है
तेरा
हुस्न
मगर
क्या
कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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ये
नहीं
है
कि
उस
सेे
प्यार
नहीं
हाँ
पर
अब
उसका
इंतिज़ार
नहीं
बारिशें
हैं
फ़ुज़ूल
उनके
लिए
जिनके
पहलू
में
जिनका
यार
नहीं
याद
करने
का
हक़
है
मुझको
फ़क़त
कॉल
करने
का
इख़्तियार
नहीं
ज़िंदगी
बोलता
हूँ
तुमको,
पर
ज़िंदगी
का
कुछ
ऐतबार
नहीं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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तुमको
छूने
के
लिए
तो
जानाँ
चाँद
पानी
में
उतर
जाता
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
उसे
भूलने
की
सोच
रहा
हूँ
जिसका
मुझ
सेे
काग़ज़
पे
लिखा
नाम
नहीं
कटता
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हारे
शहरस
आई
हुई
'बस'
को
जो
देखा
तो
मैं
तकता
ही
रहा
इस
आस
में
के
तुम
भी
उतरोगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुमने
उस
मोड़
पे
छोड़ा
है
के
अब
लगता
है
इस
से
अच्छा
था
के
मिलते
ही
बिछड़
जाते
हम
Dipendra Singh 'Raaz'
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