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Dipendra Singh 'Raaz'
mujhko uski call bhi aayi nahin is eed par
mujhko uski call bhi aayi nahin is eed par | मुझको उसकी कॉल भी आई नहीं इस ईद पर
- Dipendra Singh 'Raaz'
मुझको
उसकी
कॉल
भी
आई
नहीं
इस
ईद
पर
जो
गले
लगकर
मुबारकबाद
देता
था
मुझे
- Dipendra Singh 'Raaz'
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गले
लगाएँ
बलाएँ
लें
तुम
को
प्यार
करें
जो
बात
मानो
तो
मिन्नत
हज़ार
बार
करें
Rind lakhnavi
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गले
से
लगते
ही
जितने
गिले
थे
भूल
गए
वगर्ना
याद
थीं
हम
को
शिकायतें
क्या
क्या
Abdul Rahman Ehsaan Dehlavi
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ये
कब
कहा
था
मुझे
हमनवा
नहीं
देना
मगर
हाँ
फिर
से
वही
बे-वफ़ा
नहीं
देना
मैं
टूट
जाऊँ
तो
आकर
गले
लगा
लेना
कोई
दलील
कोई
मशवरा
नहीं
देना
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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न
जाने
क्यूँँ
गले
से
लगने
की
हिम्मत
नहीं
होती
न
जाने
क्यूँँ
पिता
के
सामने
बेटे
नहीं
खुलते
Kushal Dauneria
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मिल
के
होती
थी
कभी
ईद
भी
दीवाली
भी
अब
ये
हालत
है
कि
डर
डर
के
गले
मिलते
हैं
Unknown
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कहीं
किसी
भी
बहाने
मुझे
बुला
इक
रोज़
ऐ
चाँद
तुझ
को
क़सम
है
ज़मीं
पे
आ
इक
रोज़
मुझे
क़बूल
है
गर
खाक़
भी
हो
जाऊँ
मैं
क़रीब
आ
के
मुझे
सीने
से
लगा
इक
रोज़
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Chandan Sharma
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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गले
सब
मिल
रहे
हैं
उस
सेे
हँसकर
हमारा
हक़
तो
मारा
जा
रहा
है
Pooja Bhatia
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ये
भी
इक
तरकीब
है
दुश्मन
से
लड़ने
की
गले
लगा
लो
जिस
पर
वार
नहीं
कर
सकते
Shariq Kaifi
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बुरे
हालात
है
पर
यार
अब
भी
गले
मिलता
है,
सेहत
पूछता
है
Gagan Bajad 'Aafat'
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बशर्ते
आग
लग
जाए
मेरे
ख़ाली
मकाँ
में
फिर
उजाला
गर
न
हो
यादों
का
तेरी
इस
मकाँ
में
तो
Dipendra Singh 'Raaz'
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अब
उस
गली
में
अमूमन
तो
मैं
नहीं
जाता
कभी
कभार
कोई
याद
खींच
लेती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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बोसे
हैं
किसी
और
के
ही
हक़
में
अब
उसके
बाँहें
हैं
किसी
और
को
अब
उसकी
मुयस्सर
Dipendra Singh 'Raaz'
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मुमकिन
नहीं
थी
ख़्वाबों
की
ता'बीर
सो
मैं
ख़्वाबों
की
तस्वीर
बनाया
करता
था
Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरे
फूलों
को
किताबों
में
छुपा
रक्खा
है
तेरी
तस्वीर
को
सिरहाने
लगा
रक्खा
है
तुझ
सेे
मिलकर
के
गले
रख
दिए
अलमारी
में
तेरी
ख़ुशबू
को
लिबासों
में
दबा
रक्खा
है
उम्र
भर
हाथ
ये
तेरा
नहीं
है
मेरा
मगर
ये
भी
काफ़ी
है
के
कुछ
देर
थमा
रक्खा
है
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Dipendra Singh 'Raaz'
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