jab kabhi bhi is jahaan se rukhsati mujh ko mile | जब कभी भी इस जहाँ से रुख़्सती मुझ को मिले

  - Dipak Prajapati Khaalis
जबकभीभीइसजहाँसेरुख़्सतीमुझकोमिले
क़ब्लइससेख़ुदाकुछज़िंदगीमुझकोमिले
मैंतोज़िंदाहूँअँधेरोंपरसोमुझकोहैयेडर
मरजाऊँमैंअगरकुछरौशनीमुझकोमिले
उम्रभरमैंअपनेआँसूआब-सूरतपीसकूँ
चाहताहूँइसतरहकीतिश्नगीमुझकोमिले
इकज़रादेखेसेमेरेनफ़रतेंहोजाएँख़त्म
मिलसकेमुझकोतोयेजादूगरीमुझकोमिले
जैसाबाहरसहोवैसाहीवोअंदरसेभीहो
काशइसदुनियामेंऐसाआदमीमुझकोमिले
क्यूँमिरीक़िस्मतमेंउसनेदर्द-ओ-ग़मकुछकमलिखे
पूछलूँगामैंख़ुदासगरकभीमुझकोमिले
  - Dipak Prajapati Khaalis
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