khayal se to ibtida hui hai kaayenaat ki | ख़याल से तो इब्तिदा हुई है काएनात की

  - Dilnawaz Siddiqi
ख़यालसेतोइब्तिदाहुईहैकाएनातकी
अमलकीदस्तरसमेंहैंहदेंतख़य्युलातकी
फ़क़तअमलकीएकबातकरहज़ारबातकी
रुख़-ए-हयातसेउठारिदातवक़्क़ुआ'तकी
यहीतोइकदलीलहैमरीज़-ए-नफ़सियातकी
अदूयेज़िम्मेदारियाँहैंअपनीवाजिबातकी
सज़ाहैकिसगुनाहकीकिऐसेपासबाँमिले
जोदुश्मनोंसेमाँगतेहैंभीकइल्तिफ़ातकी
हज़ाररास्तेहैंयूँँतोगुमरहीकेवास्ते
मगरसिरात-ए-मुस्तक़ीमएकहैनजातकी
  - Dilnawaz Siddiqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy