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Dhiraj Singh 'Tahammul'
zindagi ki shama jab jalaaii gaii
zindagi ki shama jab jalaaii gaii | ज़िंदगी की शमा जब जलाई गई
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
ज़िंदगी
की
शमा
जब
जलाई
गई
दर्द
की
संग
में
रौशनाई
गई
अश्क
आँखें
मुसलसल
बहाती
रहीं
पे
मुसलसल
ही
ग़ज़लें
सुनाई
गई
याद
तेरी
रही
साथ
मेरे
मगर
याद
भी
साथ
क्या
वो
भी
आई
गई
ज़ेहन
को
थी
ख़बर
वो
नहीं
है
यहाँ
और
दिल
को
तसल्ली
दिलाई
गई
ले
के
तेरा
गिला
दोस्तों
से
मिला
हस्ब-ए-दस्तूर
मय
भी
पिलाई
गई
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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वा'दा
करो
कि
हाथ
छुड़ाकर
न
जाओगे
वा'दा
करो
कि
सात
जनम
तक
रहेगा
इश्क़
Mukesh Jha
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जानता
हूँ
कि
तुझे
साथ
तो
रखते
हैं
कई
पूछना
था
कि
तेरा
ध्यान
भी
रखता
है
कोई?
Umair Najmi
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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अब
साथ
नहीं
है
भी
तो
शिकवा
नहीं
'अख़्तर'
एहसान
भी
मुझ
पर
मिरे
भाई
के
बहुत
थे
Majeed Akhtar
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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चराग़ाँ
ढूँढते
हैं
आतिश-ए-दिल
को
बुझाने
को
मुहब्बत
की
समझ
दे
कौन
इस
जाहिल
ज़माने
को
फ़रार-ए-क़ैद
लेकर
उड़
गया
ख़ुशियाँ
घराने
की
किया
था
क़ैद
इक
पंछी
कि
घर
का
दिल
लगाने
को
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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साथ
दिया
है
किसने
किसका
किसकी
सोहबत
कौन
चलेगा
मेरी
ज़िल्लत
मेरी
ख़िफ़्फ़त
लेकर
तोहमत
कौन
चलेगा
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ज़िक्र
होता
है
तिरा
जब
भी
धड़कता
दिल
बहुत
है
भूलना
तुझको
सितमगर
आज
भी
मुश्किल
बहुत
है
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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छोड़कर
तीर-ए-नज़र
जान-ए-जिगर
देखो
नहीं
देखते
हो
जिस
क़दर
तुम
उस
क़दर
देखो
नहीं
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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