ye aañkhen raah takti hain tumhein ye man bulaata hai | ये आँखें राह तकती हैं तुम्हें ये मन बुलाता है

  - Devesh Dixit
येआँखेंराहतकतीहैंतुम्हेंयेमनबुलाताहै
चलेआओतुम्हेंसूनामिराआँगनबुलाताहै
बरसतीरोज़हैंआँखेंयेबारिशहीनहींरुकती
तुम्हेंभीगेहुएअश्कोंकायेदामनबुलाताहै
जहाँपेंगेंबढ़ातेथेशजरवोयादकरतेहैं
वोझूलेपूछतेहैंअबतुम्हेंसावनबुलाताहै
गुलिस्ताँजबसेउजड़ाहैबहारेंभीनहींलौटीं
फ़ज़ाआवाज़देतीहैतुम्हेंउपवनबुलाताहै
दर-ओ-दीवारऔरराहेंसभीसद
मेंमेंरहतेहैं
सँवरतेथेजहाँपहलेवहीदर्पनबुलाताहै
चलेआओकिअबतन्हाइयाँजीनेनहींदेतीं
तुम्हेंउजड़ेहुएदिलकायेसूना-पनबुलाताहै
  - Devesh Dixit
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