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Deepak Vikal
khudkushi maana nahin hai buzdeli par
khudkushi maana nahin hai buzdeli par | ख़ुद-कुशी माना नहीं है बुज़दिली पर
- Deepak Vikal
ख़ुद-कुशी
माना
नहीं
है
बुज़दिली
पर
ख़ुद-कुशी
तो
मसअले
का
हल
नहीं
है
- Deepak Vikal
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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मौत
का
भी
इलाज
हो
शायद
ज़िंदगी
का
कोई
इलाज
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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देखो
मौत
का
मौसम
आने
वाला
है
ज़िंदा
रहना
सब
सेे
बड़ी
लड़ाई
है
Shadab Asghar
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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ज़िंदगी
दूर
ही
हमें
कर
दे
मौत
के
बाद
वस्ल
मुमकिन
है
Akash Panwar
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माँ
की
आग़ोश
में
कल
मौत
की
आग़ोश
में
आज
हम
को
दुनिया
में
ये
दो
वक़्त
सुहाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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बद्दुआ
है
तू
रहे
उसकी
नज़र
के
सामने
देखने
वाला
तेरी
तस्वीर
को
देखा
करे
Deepak Vikal
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कई
तमग़े
उन्हें
हासिल
नहीं
थे
नहीं
ऐसा
कि
वो
क़ाबिल
नहीं
थे
कहानी
थी
हमारी
ही
वो
लेकिन
कहानी
में
हमीं
शामिल
नहीं
थे
दिलों
का
भी
अँधेरा
सोख
लेते
उजाले
उस
तरह
नाज़िल
नहीं
थे
मैं
इक
ऐसी
नदी
में
ना-ख़ुदा
था
नदी
जिसके
कहीं
साहिल
नहीं
थे
समझते
थे
तिरी
दानिश्वरी
भी
अजी
हम
इस
क़दर
जाहिल
नहीं
थे
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Deepak Vikal
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एक
सफ़र
पूरा
होने
में
कितने
लोग
बिछड़ते
हैं
सो
अबको
कम
रफ़्तारी
है
कमजोशी
का
आलम
है
Deepak Vikal
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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हम
अपनी
ज़ीस्त
से
बेज़ार
होकर
चले
हैं
काम
पर
तैयार
होकर
बहुत
दिन
बाद
चारा-गर
हमारा
मिला
हमको
बहुत
बीमार
होकर
समुंदर
में
उभर
आए
किनारे
सफ़र
जब
भी
किया
मयख़्वार
होकर
हमारी
परवरिश
भी
इक
सबब
है
जो
तुमको
चुभ
रहे
हैं
ख़ार
होकर
न
ले
जाए
चुराकर
ख़्वाब
कोई
कि
सोना
है
मुझे
बेदार
होकर
मिरी
तक़दीर
का
रौशन
सितारा
पड़ा
होगा
कहीं
बीमार
होकर
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Deepak Vikal
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