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Deepak Vikal
ik nayi gudiya ko lekar khilkhilaana tha magar
ik nayi gudiya ko lekar khilkhilaana tha magar | इक नई गुड़िया को लेकर खिलखिलाना था मगर
- Deepak Vikal
इक
नई
गुड़िया
को
लेकर
खिलखिलाना
था
मगर
सिर्फ़
बच्ची
मुस्कुराई
मुस्कुराकर
रुक
गई
- Deepak Vikal
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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वो
माएँ
आज
भी
सुसराल
के
तानों
की
ज़द
में
हैं
कि
जिन
की
कोख
से
बेटी
तो
है
बेटा
नहीं
होता
Sameer Buldanvi
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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उसका
नंबर
नहीं
किसी
ने
लिया
सब
समझते
रहे
परी
होगी
Idris Babar
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लटकन
झटकन
ओढ़
मटकते
एक
परी
का
दिख
जाना,
प्लेन
गुजरने
पर
बचपन
के
ख़ुश
होने
सा
लगता
है!
बिन्दी,
लिपस्टिक,
चूड़ी,
कंगन
और
किनारा
साड़ी
का,
लाल
कलर
पर
कब्ज़ा
अय
हय
कितना
अच्छा
लगता
है!
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Atul K Rai
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बीस
बरस
तक
बाप
उधड़ता
है
थोड़ा
थोड़ा
तब
सिलता
है
इक
बेटी
की
शादी
का
जोड़ा
Tanoj Dadhich
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मज़दूर
भले
सारी
ही
उम्र
करे
मेहनत
बेटी
की
विदाई
लायक़
पैसे
नहीं
होते
Amaan Pathan
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तू
है
मुस्लिम
वो
पण्डित
की
बेटी
है
उस
लड़की
पर
तेरा
मरना
ठीक
नहीं
Shadab Asghar
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
Harsh saxena
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बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
Nawaz Deobandi
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ख़ुद-कुशी
माना
नहीं
है
बुज़दिली
पर
ख़ुद-कुशी
तो
मसअले
का
हल
नहीं
है
Deepak Vikal
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मुझ
सेे
अगर
ये
चाहते
हो
आदमी
रहूँ
बाज़ार
जा
रहा
हूँ
मुझे
रोक
लीजिये
Deepak Vikal
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जिसको
अपने
आप
का
पता
नहीं
अस्ल
में
उसे
ख़ुदा
पता
नहीं
एक
शख़्स
हँस
रहा
था
जो
अभी
ज़िन्दगी
थी
ख़्वाब
था
पता
नहीं
वो
नसीहतें
न
दें
तो
ख़ैर
हो
जिनको
मेरा
मसअला
पता
नहीं
एक
तो
सियाह
रात
का
सफ़र
और
मुझको
रास्ता
पता
नहीं
जुस्तजू
रही
है
जिसकी
अब
तलक
वो
मिला
नहीं
मिला
पता
नहीं
कैसा
जोग
लग
गया
मुझे
विकल
हिज्र
का
विसाल
का
पता
नहीं
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Deepak Vikal
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हम
अपनी
ज़ीस्त
से
बेज़ार
होकर
चले
हैं
काम
पर
तैयार
होकर
बहुत
दिन
बाद
चारा-गर
हमारा
मिला
हमको
बहुत
बीमार
होकर
समुंदर
में
उभर
आए
किनारे
सफ़र
जब
भी
किया
मयख़्वार
होकर
हमारी
परवरिश
भी
इक
सबब
है
जो
तुमको
चुभ
रहे
हैं
ख़ार
होकर
न
ले
जाए
चुराकर
ख़्वाब
कोई
कि
सोना
है
मुझे
बेदार
होकर
मिरी
तक़दीर
का
रौशन
सितारा
पड़ा
होगा
कहीं
बीमार
होकर
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Deepak Vikal
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मंज़र
पानी
पानी
है
आँखों
में
वीरानी
है
वो
जो
है
इक
बर्फ़
नदी
भीतर
बहता
पानी
है
मैं
भी
ज़िंदा
रहता
पर
दुनिया
भी
तो
फ़ानी
है
सूरज
पे
काला
धब्बा
उसकी
कारस्तानी
है
अब
तो
ख़्वाबों
की
दुनिया
बिल्कुल
ही
अनजानी
है
हम
आदम
के
बच्चे
थे
लेकिन
बात
पुरानी
है
नाम
रहेगा
राजा
का
जंग
में
आगे
रानी
है
ख़त्म
कहानी
कैसे
हुई
ये
भी
एक
कहानी
है
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Deepak Vikal
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