लाख चाहे बाइस-ए-आज़ार होना चाहिए था

  - Deenbandhu Jaiswal
लाखचाहेबाइस-ए-आज़ारहोनाचाहिएथा
दिनबदलनेकामगरआसारहोनाचाहिएथा
मैंकहाँयेकहरहाफलदारहोनाचाहिएथा
कमसेकमयहपेड़साया-दारहोनाचाहिएथा
फूलहोबसइसलिएतुमरोज़मसलेजारहेहो
वक़्तजैसाहैतुम्हेंतोख़ारहोनाचाहिएथा
जिसतरहझूठीख़बरकोआपफैलातेयहाँहैं
आपकोइंसाँनहींअख़बारहोनाचाहिएथा
डूबतीकश्तीनहींगरआपजोथोड़ासमझते
आपकोतूफ़ाँनहींपतवारहोनाचाहिएथा
ज़ीस्तभरइकशख़्ससेआगेनहींकुछसोचपाना
इश्क़मेंक्यायूँँकोईलाचारहोनाचाहिएथा
जिसतरहसेधर्मकानुक़सानहोताजारहाहै
अबतलकतोकल्किकाअवतारहोनाचाहिएथा
  - Deenbandhu Jaiswal
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