hai yaad-e-yaar se ik aag mushta'il dil men | है याद-ए-यार से इक आग मुश्तइ'ल दिल में

  - Dattatriya Kaifi
हैयाद-ए-यारसेइकआगमुश्तइ'लदिलमें
अजबहैख़ुल्द-ओ-जहन्नमहैंमुत्तसिलदिलमें
जोचुपकेचुपकेहमेंकुछकहेवोअपसुने
पड़ेउसीकोजोकोसेगाहमकोदिलदिलमें
करोगेअबभीबुराईमय-ए-मुग़ाँकीशैख़
कहिएमुँहसेमगरहोगेतोख़जिलदिलमें
गएवोपानीतोमुल्तानअबगिनोमौजें
कहाँवोजोशअबअश्कपा-ब-गुलदिलमें
उलूयेख़ूबहुआआपतुमचलेआए
मैंकहताहीथाकिआजउनसेजाकेमिलदिलमें
पकड़जोकललियाचुस्कीलगातेज़ाहिदको
बताऊँक्याकिहुआकैसामुन्फ़इलदिलमें
  - Dattatriya Kaifi
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