kaayenaat-e-aarzoo men ham basar karne lage | काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

  - Chitransh Khare
काएनात-ए-आरज़ूमेंहमबसरकरनेलगे
सबबहुतनफ़रतसेक्यूँँहमपरनज़रकरनेलगे
तेरेहरलम्हेकाहमनेआजतकरक्खाहिसाब
येअलगहैबातख़ुदकोबे-ख़बरकरनेलगे
ज़िंदगीकोअलविदा'अकहकरचलाजाऊँगामैं
जबमिरीतन्हाईमुझकोदर-ब-दरकरनेलगे
मुल्ककीबर्बादियाँउसवक़्ततयहोजाएँगी
जबबुरीतहज़ीबबच्चोंपरअसरकरनेलगे
या-ख़ुदाराह-ए-वफ़ापररहबरीकरनामेरी
जबमुझेगुमराहमेराहम-सफ़रकरनेलगे
छोड़करउसवक़्तओहदेख़ुदचलाजाऊँगामैं
शकजहाँकोईमिरेईमानपरकरनेलगे
इश्क़केउसमोड़कोसबलोगकहतेहैंजुनूँ
दिलकिसीकोयादजबशाम-ओ-सहरकरनेलगे
  - Chitransh Khare
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