muskuraahat ke suron ko deti hai jab taal aañkhen | मुस्कुराहट के सुरों को देती है जब ताल आँखें

  - Chetan Dadhich
मुस्कुराहटकेसुरोंकोदेतीहैजबतालआँखें
बेतहाशाचढ़तीहैतकतीमुझेवोलालआँखें
क्यूँँहैपीनेकीमनाहीगरयेदोआँखेंहैजायज़
लाखोंइनपेफिसलेहोंगेपरदेमेंतूडालआँखें
येज़रूरीहैनहींकेफाँसलेदीदार-ए-चेहरा
हुस्नगरहोपरदेमेंभीबुनतीहैतबजालआँखें
हैयेमुमकिनभूलभीजाऊँवोचेहरागरकभीतो
भूलनेमेंलेगीफिरभीवोकईसौसालआँखें
कैसेहो'चेतन'यूँँचश्म-ए-यारकातुमसेेतग़ाफ़ुल
मीरकीगातीग़ज़लनुसरतसीवोकव्वालआँखें
  - Chetan Dadhich
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