aaj phir ghaat men baitha hai samundar ka sukoot | आज फिर घात में बैठा है समुंदर का सुकूत

  - Chandrabhan Khayal
आजफिरघातमेंबैठाहैसमुंदरकासुकूत
हमकोइकदूसरेसेदूरहीरहनाहोगा
हमकोहरहालमेंमजबूरहीरहनाहोगा
मुझकोइसदौर-ए-जराहतसेगुज़रजानेदे
मुझकोजीनेकीतमन्नानहींमरजानेदे
मेरीतक़दीरमेंग़महैंतोकोईबातनहीं
मुझकोज़ुल्मतकीगुफाओंमेंउतरजानेदे
तूघबराकितिरेहुस्नकीमिश्अललेकर
तेरेहमराहकभीतेरेबिछौनेकेक़रीब
रातभरधूममचाएगामिरेजिस्मकाभूत
आजफिरघातमेंबैठाहैसमुंदरकासुकूत
ज़र्फ़बाक़ीकोईअज़्म-ए-निहाँबाक़ीहै
सिर्फ़एहसासकेचेहरेपेधुआँबाक़ीहै
कोईसायाहैसाथीहैमहफ़िलकोई
दिलकशीख़त्महैफिरक्यूँँयेजहाँबाक़ीहै
येजहाँजिसमेंसबअतराफ़तबाहीकेनिशाँ
सूरतशक्लपेज़ख़्मोंकीतरहफैलेहैं
औरहरज़ख़्महैइंसानकीवहशतकासुबूत
आजफिरघातमेंबैठाहैसमुंदरकासुकूत
तल्ख़तन्हाईकाइकदर्दलिएचेहरेपर
लेकेफिरताहूँमैंज़ख़्मोंकेदिएचेहरेपर
रूहमजरूहजबींज़ख़्म-ज़दादिलघाइल
फिरभीहँसताहूँनईआसलिएचेहरेपर
ज़िंदगीहैकिकिसीशाहकीबेगमजिसको
वक़्तबाज़ारमेंलायाहैबरहनाकरके
औरख़ामोशहैंतहज़ीबतमद्दुनकेसपूत
आजफिरघातमेंबैठाहैसमुंदरकासुकूत
वक़्तकहताहैहमेंदूरहीरहनाहोगा
हमकोहरहालमेंमजबूरहीरहनाहोगा
  - Chandrabhan Khayal
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