aaj phir dard utha dil ke nihaan khaane men | आज फिर दर्द उठा दिल के निहाँ ख़ाने में

  - Chandrabhan Khayal
आजफिरदर्दउठादिलकेनिहाँख़ानेमें
आजफिरलोगसतानेकोचलेआएँगे
आजफिरकर्बकेशो'लोंकोहवादूँगामैं
औरकुछलोगबुझानेकोचलेआएँगे
आगसेआगबुझीहैबुझेगीलेकिन
दर्दकोआगकेदरियामेंउतरनाहोगा
आगऔरदर्दकेमेआ'रपरखनेकेलिए
इनअँधेरोंकीफ़सीलोंसेगुज़रनाहोगा
मैंअँधेरोंकीरिफ़ाक़तसेनहींहूँबेज़ार
शाम-ए-तन्हाईअँधेराभीभलालगताहै
हैफ़सदहैफ़किमुंकिरथाज़मानाजिसका
आजवोजुर्ममकानोंमेंहुआलगताहै
लाखकमरेकोटटोलाभीमगरकुछमिला
फ़र्शपरख़ूनकीदो-चारलकीरोंकेसिवा
जंगऔरज़ुल्मकेअसरारनिहाँज़िंदाँ
जानपाएगाभलाकौनअसीरोंकेसिवा
दर्ददिलहैकिभटकतीहुईरूहोंकाजलाल
क़त्लहोकरभीधड़कताहैजोवीरानोंमें
मैंसुलगताहीरहाऔरवोअंदाज़-ए-जुनूँ
छुपगयाआगलगाकरमिरेअरमानोंमें
  - Chandrabhan Khayal
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