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Brajnabh Pandey
vo tere khaatir jo sapna dekha tha braj
vo tere khaatir jo sapna dekha tha braj | वो तेरे ख़ातिर जो सपना देखा था 'ब्रज'
- Brajnabh Pandey
वो
तेरे
ख़ातिर
जो
सपना
देखा
था
'ब्रज'
अब
वो
कोई
और
पूरा
कर
रहा
है
- Brajnabh Pandey
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ऐसा
तो
इस
ज़िंदगी
में
मैं
तेरा
क्या
खा
गया
जाँ
के
तेरा
इश्क़
इन
आँखों
का
दरिया
खा
गया
जिसको
कहता
रहता
था
दुनिया
मेरी
दुनिया
मेरी
ब्रज
वही
आख़िर
में
मेरी
सारी
दुनिया
खा
गया
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Brajnabh Pandey
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जान
दी
थी
जिसने
रानी
के
लिए
रोए
थे
सब
उस
सिपाही
के
लिए
रात
का
वो
हादसा
काफ़ी
है
दोस्त
उम्र
भर
की
इस
उदासी
के
लिए
यूँँ
नहीं
मानेगी
वो
ऐ
दोस्त
सुन
जान
देनी
होगी
शादी
के
लिए
तोड़ना
सारे
के
सारे
सपनों
को
मस्खरी
सा
है
ग़रीबी
के
लिए
बे-वफ़ाई
भी
की
तो
आधी
ही
ख़ैर
कुछ
तो
छोड़ा
उस
दिवानी
के
लिए
यार
वो
बच्चा
भी
रोता
रह
गया
रात
भर
बस
इक
कहानी
के
लिए
ब्रज
पिता
की
उम्र
गुज़री
लोन
में
बस
तेरी
अच्छी
जवानी
के
लिए
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Brajnabh Pandey
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हँसता
भी
हूँ
तो
दर्द
होता
है
मुझे
ये
ज़ख़्म
भी
ब्रज
इश्क़
के
जैसा
ही
है
Brajnabh Pandey
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कुछ
न
देना
इधर
उधर
देना
मुझ
पे
बस
जाँ
तू
इक
नज़र
देना
बात
जब
आए
बोसे
की
जाना
मैं
कहूँ
मत
दे
तू
मगर
देना
गर
गया
पकड़ा
फेंकने
में
ख़त
सारे
इल्ज़ाम
मुझ
पे
धर
देना
और
ख़त
पढ़
वो
मान
जाए
गर
तेरा
सब
मेरे
नाम
कर
देना
देना
जब
कुछ
मुझे
ख़ुदा
तो
बस
भूलने
का
उसे
हुनर
देना
मेरे
सारे
उदासी
के
धन
का
मेरे
बेटे
तू
त्याग
कर
देना
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Brajnabh Pandey
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जान
क्यूँँ
तू
मुझको
घाइल
कर
रहा
है
दिल
भी
मुझ
सेे
यार
दंगल
कर
रहा
है
क्या
बताऊँ
खलबली
दिल
में
मची
है
मुझको
तेरा
हुस्न
पागल
कर
रहा
है
ज़िंदगी
मेरी
तो
बंजर
हो
गई
है
पर
ये
तेरा
प्यार
बादल
कर
रहा
है
दश्त
का
माहौल
सा
था
तू
जो
बिछड़ा
फिर
तू
आ
कर
मुझ
को
जंगल
कर
रहा
है
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Brajnabh Pandey
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