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Brajnabh Pandey
tum unse poochho kya qayaamat si guzarti hai yahaañ
tum unse poochho kya qayaamat si guzarti hai yahaañ | तुम उन सेे पूछो क्या क़यामत सी गुज़रती है यहाँ
- Brajnabh Pandey
तुम
उन
सेे
पूछो
क्या
क़यामत
सी
गुज़रती
है
यहाँ
वो
लोग
सब
जो
अपने
हीं
हाथों
से
मारे
जाते
हैं
- Brajnabh Pandey
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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जान
दी
थी
जिसने
रानी
के
लिए
रोए
थे
सब
उस
सिपाही
के
लिए
रात
का
वो
हादसा
काफ़ी
है
दोस्त
उम्र
भर
की
इस
उदासी
के
लिए
यूँँ
नहीं
मानेगी
वो
ऐ
दोस्त
सुन
जान
देनी
होगी
शादी
के
लिए
तोड़ना
सारे
के
सारे
सपनों
को
मस्खरी
सा
है
ग़रीबी
के
लिए
बे-वफ़ाई
भी
की
तो
आधी
ही
ख़ैर
कुछ
तो
छोड़ा
उस
दिवानी
के
लिए
यार
वो
बच्चा
भी
रोता
रह
गया
रात
भर
बस
इक
कहानी
के
लिए
ब्रज
पिता
की
उम्र
गुज़री
लोन
में
बस
तेरी
अच्छी
जवानी
के
लिए
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Brajnabh Pandey
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उम्र
भर
यारों
मैं
जिसके
साथ
सोया
उसके
जाने
पर
मैं
ख़ाली
हाथ
सोया
यार
उसको
भूलने
के
वास्ते
मैं
जाने
कितनी
रातें
उसके
साथ
सोया
मेरा
दिल
तो
जानता
तक
था
न
उसको
अब
के
पहलू
में
जो
मेरे
साथ
सोया
और
मोहब्बत
होना
तो
लाज़िम
है
उसको
जो
भी
बस
इक
रात
उसके
साथ
सोया
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Brajnabh Pandey
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मैंने
बस
एक
बोसा
चाहा
था
उस
से
वो
शख़्स
आया
मगर
मेरी
क़ज़ा
के
बाद
Brajnabh Pandey
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मुझको
बहुत
भाता
है
तेरा
बचपना
तू
बात
मान
बस
आज
की
ये
रात
तू
यूँँ
बचपने
में
मत
गुज़ार
Brajnabh Pandey
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मेरे
दिल
मान
जा
तू
मुझ
सेे
यूँँ
रूठा
न
कर
हर
बार
वो
जो
तुझको
मनाता
था
वो
कब
का
जा
चुका
है
यार
Brajnabh Pandey
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