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Brajnabh Pandey
baatein meri koi samajhta hi nahin
baatein meri koi samajhta hi nahin | बातें मेरी कोई समझता ही नहीं
- Brajnabh Pandey
बातें
मेरी
कोई
समझता
ही
नहीं
मेरी
उदासी
कौन
समझेगा
भला
- Brajnabh Pandey
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तिरे
बग़ैर
भी
हम
जी
रहे
हैं
और
ख़ुश
हैं
ये
बात
कम
तो
नहीं
है
तुझे
जलाने
को
Imran Aami
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारे
पास
आते
हैं
तो
साँसें
भीग
जाती
हैं
मोहब्बत
इतनी
मिलती
है
कि
आँखें
भीग
जाती
हैं
तबस्सुम
इत्र
जैसा
है
हँसी
बरसात
जैसी
है
वो
जब
भी
बात
करती
है
तो
बातें
भीग
जाती
हैं
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Aalok Shrivastav
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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है
कुछ
ऐसी
ही
बात
जो
चुप
हूँ
वर्ना
क्या
बात
कर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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ज़िंदगी
ऐसे
हमें
जीना
पड़े
है
मौत
जिस
में
एक
तोहफ़ा
सा
लगे
है
और
रहा
जाता
नहीं
हम
सेे
यहाँ
पर
और
यहीं
पर
जाँ
हमारे
पा
गड़े
है
हाथ
जोड़े
है
तू
जिसके
सामने
जाँ
वो
भरी
महफ़िल
हमारे
पा
पड़े
है
है
वो
सारे
शहर
में
बदनाम
फिर
भी
जान
तू
उसको
भरी
महफिल
छुए
है
मैं
तो
मुझको
ब्रज
बहुत
ख़ुश
ही
लगू
हूँ
तुझको
क्यूँ
मुझ
में
उदासी
सी
लगे
है
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Brajnabh Pandey
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हँसता
भी
हूँ
तो
दर्द
होता
है
मुझे
ये
ज़ख़्म
भी
ब्रज
इश्क़
के
जैसा
ही
है
Brajnabh Pandey
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मेरे
दिल
मान
जा
तू
मुझ
सेे
यूँँ
रूठा
न
कर
हर
बार
वो
जो
तुझको
मनाता
था
वो
कब
का
जा
चुका
है
यार
Brajnabh Pandey
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बस
वो
इक
शख़्स
के
न
होने
से
आज
का
दिन
उदास
गुज़रेगा
Brajnabh Pandey
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अगर
जो
ज़माने
में
हर
चीज़
बिकती
दे
क़ीमत
हमारी
क़ज़ा
माँगते
हम
Brajnabh Pandey
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