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Brajnabh Pandey
zindagi aise ha
zindagi aise ha | ज़िंदगी ऐसे हमें जीना पड़े है
- Brajnabh Pandey
ज़िंदगी
ऐसे
हमें
जीना
पड़े
है
मौत
जिस
में
एक
तोहफ़ा
सा
लगे
है
और
रहा
जाता
नहीं
हम
सेे
यहाँ
पर
और
यहीं
पर
जाँ
हमारे
पा
गड़े
है
हाथ
जोड़े
है
तू
जिसके
सामने
जाँ
वो
भरी
महफ़िल
हमारे
पा
पड़े
है
है
वो
सारे
शहर
में
बदनाम
फिर
भी
जान
तू
उसको
भरी
महफिल
छुए
है
मैं
तो
मुझको
ब्रज
बहुत
ख़ुश
ही
लगू
हूँ
तुझको
क्यूँ
मुझ
में
उदासी
सी
लगे
है
- Brajnabh Pandey
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बाद
भी
तेरे
फूल
तोड़े
कई
किसी
ख़ुशबू
में
वो
सुकून
नहीं
Brajnabh Pandey
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बस
वो
इक
शख़्स
के
न
होने
से
आज
का
दिन
उदास
गुज़रेगा
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मैं
सोचता
हूँ
इस
जहाँ
में
क्या
ही
दूँगा
जाँ
तुझे
अपना
बना
तो
लूँ
मगर
कैसे
रखूँगा
जाँ
तुझे
तू
पूछती
है
मुझ
सेे
अक्सर
मेरे
दिल
में
कौन
हैं
हामी
भरेगी
वा'दा
कर
तो
सच
कहूँगा
जाँ
तुझे
बस
वो
बदन
से
आ
लिपट
जाए
मेरे
इस
वास्ते
अक्सर
मैं
कहता
हूँ
उसे
ये
छोड़
दूँगा
जाँ
तुझे
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Brajnabh Pandey
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मैं
वो
सफ़र
हूँ
जो
मुकम्मल
ही
नहीं
वो
शख़्स
आख़िर
छोड़
जाएगा
मुझे
Brajnabh Pandey
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वो
पूछते
हैं
क्या
मुहब्बत
से
मिला
मैं
कहता
हूँ
सब
कुछ
गँवाने
का
हुनर
Brajnabh Pandey
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