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Brajnabh Pandey
kahte bahut the dukh meri qismat nahin
kahte bahut the dukh meri qismat nahin | कहते बहुत थे दुख मेरी क़िस्मत नहीं
- Brajnabh Pandey
कहते
बहुत
थे
दुख
मेरी
क़िस्मत
नहीं
अब
वक़्त
जो
बदला
तो
क्यूँ
हिम्मत
नहीं
अब
रोज़
आते
है
उठा
के
अपना
मुँह
इन
आँसुओं
की
अब
कोइ
क़ीमत
नहीं
और
हमने
दुख
अपना
सुनाया
अपनों
को
पर
अपनों
में
अपनी
कोई
इज़्ज़त
नहीं
- Brajnabh Pandey
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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गुफ़्तुगू
जो
तू
यूँँ
नहीं
करता
मुझको
आबाद
क्यूँँ
नहीं
करता
जो
हुआ
है
ये
इश्क़
है
तो
फिर
मुझको
बर्बाद
क्यूँँ
नहीं
करता
बोलते
है
यहाँ
सभी
मुझ
सेे
पर
कोई
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
क्यूँँ
तू
झुकता
है
उसके
आगे
यार
उस
से
दो
हाथ
क्यूँँ
नहीं
करता
मुझको
भी
डाँट
देता
है
वो
शख़्स
उसके
आगे
मैं
चूँ
नहीं
करता
मुझको
अपना
कहे
है
तू
तो
फिर
मेरे
घर
आ
जा
क्यूँँ
नहीं
करता
गाँव
के
लड़कों
जैसी
बदमाशी
शहर
का
लड़का
क्यूँँ
नहीं
करता
धोखे
जो
खाता
है
तू
इतने
यार
प्यार
तू
माँ
से
क्यूँँ
नहीं
करता
बोलता
है
यहाँ
सभी
से
वो
मुझ
सेे
फिर
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
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Brajnabh Pandey
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ये
जो
आए
हैं
हैं
सखी
के
बाद
और
सखी
आई
है
सभी
के
बाद
तुम
सभी
फूल
ख़ूब-सूरत
हो
हाँ
मगर
मेरी
उस
कली
के
बाद
अब
सभी
के
ज़बाँ
पे
है
मिरा
नाम
मैं
जो
आता
था
आख़िरी
के
बाद
सब
समझता
हूँ
आदतें
तेरी
तू
जो
आता
है
तीरगी
के
बाद
तेरे
ही
संग
मुझको
जीना
है
पर
मिरी
जान
नौकरी
के
बाद
मैं
बहुत
चाहता
हूँ
तुझको
दोस्त
बस
ये
इक
मेरी
शा'इरी
के
बाद
क्या
बताऊँ
कि
हूँ
मैं
कितना
उदास
दोस्त
वो
तेरी
बे-रुख़ी
के
बाद
घर
में
अब
कोई
ग़म
नहीं
किसी
को
दोस्त
बस
मेरी
ख़ुद-कुशी
के
बाद
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Brajnabh Pandey
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जन्म-दिन
आ
गया
है
फिर
से
दोस्त
फिर
बिछड़
जाएँगे
ये
आँखों
से
अश्क
Brajnabh Pandey
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दो
लड़कियों
से
दिल
लगा
बैठा
था
मैं
सो
चार
हिस्से
हो
गए
हैं
दिल
के
अब
Brajnabh Pandey
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उस
सितमगर
के
बिना
कैसे
रहूँ
मैं
और
सितमगर
को
रखूँ
कैसे
मेरे
पास
Brajnabh Pandey
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