hona hi kya zaroor the ye do-jahaan hain kyun | होना ही क्या ज़रूर थे ये दो-जहाँ हैं क्यूँँ

  - Behzad Lakhnavi
होनाहीक्याज़रूरथेयेदो-जहाँहैंक्यूँँ
अल्लाहइकफ़रेबमेंकौन-ओ-मकाँहैंक्यूँँ
सुनतेहैंएकदर्दतोउठताहैबार-बार
उसकीख़बरनहींहैकिआँसूरवाँहैंक्यूँँ
इनबे-नियाज़ियोंमेंभीशान-ए-नियाज़है
सज्देनहींपसंदतोफिरआस्ताँहैंक्यूँँ
जिसगुलिस्ताँमेंरोज़तड़पतीहैंबिजलियाँ
यारबउसीचमनमेंयेफिरआशियाँहैंक्यूँँ
इसकाहमेंमलालहैहमक्यूँँबदलगए
इसकानहींमलालकिवोबद-गुमाँहैंक्यूँँ
जबदिलनहींरहातोतमन्नाकाकामक्या
जबकारवाँनहींतोपस-ए-कारवाँहैंक्यूँँ
'बहज़ाद'उनकेहिज्रमेंघबरारहाहैदिल
अबक्याकहेंकिसीसेकिबसख़ानुमाँहैंक्यूँँ
  - Behzad Lakhnavi
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